मुंडन संस्कार का शुभ मुहूर्त
बच्चे के मुंडन के लिए अगले एक साल के शुभ दिन, हर तारीख़ के साथ उस दिन की तिथि, नक्षत्र और वार। नीचे यह भी लिखा है कि ये दिन किस आधार पर चुने गए हैं।
मुंडन संस्कार आम तौर पर पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में कराया जाता है, यानी विषम वर्ष में। बहुत से परिवार इसे अपने कुल देवता के मंदिर में कराते हैं, और खाटू श्याम जी, सालासर तथा मेहंदीपुर बालाजी में यह बहुत होता है। नीचे दी गई सूची परंपरा के उन्हीं नियमों से बनी है जो इसी पेज पर आगे लिखे हैं।
⚠️ यह सूची गणना से बनी है, किसी छपे हुए पंचांग से नहीं उतारी गई। परंपरा के आम नियम लगाए गए हैं, किसी परिवार की कुंडली नहीं देखी गई। तारीख़ पक्की करने से पहले अपने पंडित जी से एक बार ज़रूर मिला लीजिए। हमें बता दीजिए तो पंडित पम्पी जी आपकी कुंडली और कुल परंपरा देखकर पक्का मुहूर्त निकाल देंगे।
परंपरा में पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में, यानी विषम वर्ष में। कुछ परिवारों में सातवें वर्ष तक भी कराया जाता है। हर कुल की अपनी परंपरा होती है, इसलिए घर के बड़ों से पूछ लेना सबसे अच्छा रहता है।
परंपरा में जन्म का मास छोड़ा जाता है। इसलिए तारीख़ निकलवाते समय बच्चे की जन्म तिथि ज़रूर बता दीजिए, पंडित जी उसी हिसाब से दिन चुनेंगे। इस पेज की सूची आम नियमों से बनी है, उसमें किसी बच्चे का जन्म मास नहीं जोड़ा जा सकता।
खाटू श्याम जी, सालासर बालाजी और मेहंदीपुर बालाजी, तीनों जगह मुंडन बहुत होता है और हमारी यात्राएँ वहीं जाती हैं। बुकिंग के समय बता दीजिए, यात्रा के साथ ही व्यवस्था जोड़ दी जाएगी। वहाँ की अपनी व्यवस्था अलग से देखनी पड़ती है, इसलिए पहले से बताना ज़रूरी है।
मुंडन के बाद सिर पर धूप और ठंड दोनों जल्दी लगते हैं, इसलिए टोपी या मुलायम कपड़ा साथ रखिए। सिर पर हल्दी और चंदन का लेप लगाने की परंपरा है। उतारे हुए बाल जल में प्रवाहित किए जाते हैं या मंदिर में चढ़ाए जाते हैं।
अपनी सोची हुई तारीख़ बता दीजिए, पंडित जी देखकर पक्का बता देंगे।