हिन्दू पंचांग
दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार गणना — तिथि, नक्षत्र, योग, सूर्योदय-सूर्यास्त और आने वाले सभी बड़े व्रत-त्योहार की तारीख़ें।
इन तिथियों पर यात्रा की सीटें सबसे पहले भरती हैं — 3–4 सप्ताह पहले बुकिंग करा लेना ठीक रहता है।
चंद्रमा और सूर्य के बीच का अंतर जब 12 अंश बढ़ता है, तब एक तिथि पूरी होती है। इसीलिए तिथि 24 घंटे की नहीं होती — कभी 20 घंटे की, कभी 26 घंटे की। जिस तिथि में सूर्योदय होता है, परंपरा में उसी दिन की तिथि मानी जाती है।
अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ता है — वे 15 दिन शुक्ल पक्ष, जो पूर्णिमा पर पूरे होते हैं। फिर चंद्रमा घटता है — वे 15 दिन कृष्ण पक्ष, जो अमावस्या पर पूरे होते हैं। दोनों मिलाकर एक चंद्र मास।
आकाश के चंद्र-पथ को 27 भागों में बाँटा गया है, हर भाग एक नक्षत्र। चंद्रमा जिस भाग में हो, उस दिन का वही नक्षत्र। शुभ कार्य के मुहूर्त में नक्षत्र देखा जाता है।
एकादशी यानी ग्यारहवीं तिथि — और ग्यारहवीं तिथि दोनों पक्षों में आती है, इसलिए महीने में दो एकादशी पड़ती हैं। खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी विशेष मानी जाती है।
हमारे त्योहार अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं, चंद्रमा की तिथि से तय होते हैं। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है, इसलिए तारीख़ हर साल खिसकती है — और तीन साल में एक बार अधिक मास जोड़कर हिसाब बराबर किया जाता है।
⚠️ यह गणना से बना पंचांग है (दिल्ली सूर्योदय)। व्रत की तारीख़ पक्की करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग से एक बार मिला लें।
सीटें सीमित हैं — आज ही अपनी जगह पक्की करें।