गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त
नए घर में प्रवेश के लिए अगले एक साल के शुभ दिन, हर तारीख़ के साथ उस दिन की तिथि, नक्षत्र और वार। नीचे यह भी लिखा है कि ये दिन किस आधार पर चुने गए हैं।
गृह प्रवेश की तारीख़ अंग्रेज़ी कैलेंडर से नहीं, तिथि और नक्षत्र से तय होती है। यही कारण है कि किसी महीने में कई दिन मिलते हैं और किसी में एक भी नहीं। नीचे दी गई सूची परंपरा के उन्हीं नियमों से बनी है जो इसी पेज पर आगे लिखे हैं, ताकि आप ख़ुद देख सकें कि कोई दिन क्यों चुना गया और कोई क्यों छोड़ा गया।
⚠️ यह सूची गणना से बनी है, किसी छपे हुए पंचांग से नहीं उतारी गई। परंपरा के आम नियम लगाए गए हैं, किसी परिवार की कुंडली नहीं देखी गई। तारीख़ पक्की करने से पहले अपने पंडित जी से एक बार ज़रूर मिला लीजिए। हमें बता दीजिए तो पंडित पम्पी जी आपकी कुंडली और कुल परंपरा देखकर पक्का मुहूर्त निकाल देंगे।
परंपरा में माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ को सबसे शुभ माना जाता है, और मार्गशीर्ष को भी। आषाढ़ से कार्तिक तक का चातुर्मास छोड़ा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि उन महीनों में देव शयन करते हैं और शुभ कार्य नहीं किए जाते। पौष और चैत्र भी आम तौर पर छोड़े जाते हैं।
जी हाँ, बहुत से परिवार करते हैं। विधि वही रहती है, बस उसे छोटा रखा जाता है: गणेश पूजन, वास्तु शांति, छोटा हवन और रसोई में पहली बार दूध उबालना। पूरा हवन और ब्राह्मण भोज ज़रूरी नहीं।
परंपरा कहती है कि मुख्य द्वार, रसोई और कम से कम एक कमरा तैयार होना चाहिए। पूरा घर बनने का इंतज़ार सब नहीं कर पाते, और इसमें कोई दोष नहीं माना जाता। पर जिस दिन प्रवेश हो, उस रात घर में रुकने की परंपरा है, इसलिए इतनी तैयारी ज़रूरी है।
यह सूची आम नियमों से बनी है, यह किसी एक परिवार की कुंडली देखकर नहीं बनी। बहुत बार कुल परंपरा, घर के मुखिया की राशि या किसी विशेष कारण से कोई और दिन भी ठीक बैठ जाता है। अपनी सोची हुई तारीख़ हमें बता दीजिए, पंडित जी देखकर बता देंगे कि वो दिन चलेगा या नहीं।
अपनी सोची हुई तारीख़ बता दीजिए, पंडित जी देखकर पक्का बता देंगे।